विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️
🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷

दिनांक - - ११ सितम्बर २०२३ ईस्वी
दिन - - सोमवार

🌘 तिथि - - द्वादशी ( २३:५२ तक तत्पश्चात त्रयोदशी )

🪐 नक्षत्र - - पुष्य ( २०:०१ तक तत्पश्चात आश्लेषा )

पक्ष - - कृष्ण
मास - - भाद्रपद
ऋतु - - शरद
सूर्य - - दक्षिणायन

🌞 सूर्योदय - - प्रातः ६:०४ पर ( दिल्ली में )
🌞 सूर्यास्त - - ६:३१ पर
🌘 चन्द्रोदय -- २७:२४ पर
🌘 चन्द्रास्त - - १६:४६ पर

सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२४
कलयुगाब्द - - ५१२४
विक्रम संवत् - - २०८०
शक संवत् - - १९४५
दयानंदाब्द - - १९९

🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀

🚩‼️ओ३म‼️🚩
➖➖➖➖➖

🔥मनुष्य को दिन में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे कि रात को चैन से सो न सके और न रात्रि में ऐसा कोई कार्य करना चाहिए जिससे कि दिन में किसी को मुंह न दिखा सके। वर्ष के आठ मास ऐसा उद्योग किया जाए जिससे कि वर्षा ऋतु के चार मास सुखपूर्वक निर्वाह कर सके , युवावस्था में ऐसा आहार-विहार और आचार- विचार रखा जाए कि वृद्धावस्था सुखपूर्वक कट सके और पूरे जीवन भर ऐसे कर्म करता रहे कि सुखपूर्वक मर सके और अगला जन्म सुखपूर्वक हो सके ।

🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁

🚩‼️आज का वेद मन्त्र‼️🚩

🌷ओ३म् प्राचीमनु प्रदिशं प्रेहि विद्वानग्नेरग्ने पुरोऽअग्निर्भवेह।
विश्वाऽआशा दीद्यानो वि भाह्यूर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे॥ यजुर्वेद १७-६६॥

🌷हे तेजस्वी मनुष्य, तुम पूर्व दिशा को लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ो अर्थात ज्ञान प्राप्त करो। तुम सूर्य की तरह शिखर पर प्रकाशमान होने का प्रयत्न करो। तुम सभी दिशाओं को अपने ज्ञान से प्रकाशित करो। तुम मनुष्यों और पशुओं की उर्जा और खाद्य पदार्थों की वृद्धि हो ।

🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁

🔥विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ🕉🚩🙏

(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) 🔮🚨💧🚨 🔮

ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये परार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- चतुर्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२४ ) सृष्ट्यब्दे】【 अशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८०) वैक्रमाब्दे 】 【 द्विशतीतमे ( २००) दयानन्दाब्दे, पिंगल-संवत्सरे, रवि- दक्षिणायने, शरद -ऋतौ, भाद्रपद - मासे, कृष्ण - पक्षे, द्वादश्यां तिथौ, पुष्य
नक्षत्रे, सोमवासरे
तद्नुसार ११ सितम्बर , २०२३ ईस्वी , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे
आर्यावर्तान्तर्गते…..प्रदेशे…. जनपदे…नगरे… गोत्रोत्पन्न….श्रीमान .( पितामह)… (पिता)…पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)…अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे

🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *